आपका स्वागत है Delhi Law Firm में — आपका भरोसेमंद कानूनी साथी जो डिजिटल युग में कानूनी जागरूकता लेकर आता है।
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⚖️ परिचय
आज सोशल मीडिया पर हर कोई रोजाना पोस्ट को लाइक, शेयर या कमेंट करता है। लेकिन क्या सिर्फ किसी अश्लील पोस्ट को “लाइक” करने से अपराध बनता है?
क्या यह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act, 2000) के तहत दंडनीय है?
आइए इसे समझते हैं।
📜 धारा 67 – सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000
इस धारा के अनुसार, जो भी व्यक्ति किसी अश्लील सामग्री को प्रकाशित (publish) या प्रसारित (transmit) करता है, या करवाता है, उसे सजा और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
यह कानून उन लोगों पर लागू होता है जो सक्रिय रूप से अपलोड या शेयर करते हैं, न कि उन पर जो केवल देखते या लाइक करते हैं।
⚖️ इलाहाबाद उच्च न्यायालय का निर्णय
Mohammad Imran Khan v. State of Uttar Pradesh केस में अदालत ने स्पष्ट किया कि
> “सिर्फ किसी पोस्ट को लाइक करना, प्रकाशित या प्रसारित करना नहीं माना जा सकता।”
“लाइक” करना केवल एक निष्क्रिय प्रतिक्रिया (passive reaction) है, अपराध नहीं।
लेकिन अगर कोई व्यक्ति अश्लील फोटो, वीडियो या मैसेज को अपलोड या शेयर करता है, तो वह दंडनीय अपराध है।
💡 लाइक और शेयर का अंतर
- लाइक: केवल प्रतिक्रिया है, जो आपके प्रोफाइल तक सीमित रहती है।
- शेयर: सामग्री को दूसरों तक पहुँचाना यानी प्रसारण करना — यही अपराध की सीमा है।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय
1. Aveek Sarkar v. State of West Bengal (2014): सुप्रीम कोर्ट ने पुराने Hicklin Test को हटाकर Community Standards Test लागू किया — यानी समाज के सामान्य नैतिक मानकों के आधार पर तय होगा कि क्या अश्लील है।
2. Shreya Singhal v. Union of India (2015): अदालत ने धारा 66A को असंवैधानिक घोषित किया और ऑनलाइन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सुरक्षित किया।
💬 इसका अर्थ आपके लिए
अगर आपने केवल किसी पोस्ट को “लाइक” किया है, तो यह अपराध नहीं है।
लेकिन यदि आपने अश्लील सामग्री को अपलोड, शेयर या फॉरवर्ड किया है, तो आप कानूनी रूप से जिम्मेदार होंगे।
🧠 डिजिटल जागरूकता और जिम्मेदारी
भारतीय न्यायालयों का उद्देश्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक मर्यादा दोनों की रक्षा करना है।
इसलिए हमें सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना चाहिए।
याद रखें: सोचिए, फिर पोस्ट कीजिए। जागरूक रहिए, क्योंकि जागरूकता ही सुरक्षा है।
📞 कानूनी सहायता
यदि आपको कभी आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत नोटिस या शिकायत मिले, तो तुरंत कानूनी सलाह लें।
हेल्पलाइन: 9990649999 | 9999889091
जागरूक रहिए, जिम्मेदार रहिए, और कानूनी रूप से सुरक्षित रहिए।

